“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
किसी डायरी का खाली पन्ना
किसी डायरी का
एक खाली पन्ना
न तारीख़ लिखी है,
न कोई शब्द।
बस
काग़ज़ की सफ़ेदी में
कई अनकही बातें
धीरे-धीरे साँस ले रही हैं।
शायद
किसी दिन
कोई याद आएगी
और यह ख़ामोशी
शब्द बन जाएगी
मुकेश्,,,
No comments:
Post a Comment