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Friday, 13 March 2026

मेज़ पर छूटी हुई कलम

 मेज़ पर छूटी हुई कलम

मेज़ पर

छूटी हुई है

एक कलम।

स्याही अब भी है,

पर शब्द

कहीं रुक गए हैं।

शायद

कोई वाक्य

आधा लिखकर

सोच में खो गया होगा।

काग़ज़ चुप है,

कलम भी चुप है—

मुकेश्,,,,, 

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