ब्लैक होल का मौन
ब्लैक होल
कोई शोर नहीं करता।
वह विस्फोट की स्मृति है,
पर स्वयं
पूर्ण मौन।
जब एक विराट तारा
अपने ही गुरुत्व में ढह जाता है,
तो प्रकाश तक
उसकी पकड़ से छूट नहीं पाता।
इवेंट होराइज़न—
एक अदृश्य सीमा-रेखा,
जहाँ से वापसी का अर्थ
गणित में तो है,
वास्तव में नहीं।
उसके भीतर
स्थान और समय
अपनी भूमिकाएँ बदल लेते हैं।
समय दिशा बन जाता है,
और दिशा
अनिवार्यता।
बाहर से देखने वाले के लिए
सब कुछ ठहरा हुआ लगता है
गिरती वस्तु
धीरे-धीरे जमी हुई छवि में बदलती है।
पर भीतर
गुरुत्व का तंतु
सबको एक बिंदु की ओर
खींचता रहता है
सिंगुलैरिटी,
जहाँ समीकरण
उत्तर देना छोड़ देते हैं।
फिर भी
ब्लैक होल पूर्ण अंधकार नहीं।
कहा जाता है
क्वांटम स्पंदनों के कारण
उसके किनारों से
सूक्ष्म विकिरण रिसता है,
मानो मौन भी
पूरी तरह मौन न हो।
आकाशगंगाओं के केंद्र में
वे स्थिर बैठे हैं
दृश्य ब्रह्मांड के अदृश्य नियंता।
उनके बिना
तारों का चक्र
अव्यवस्थित हो जाए।
ब्लैक होल का मौन
विनाश का प्रतीक नहीं
सीमा का बोध है।
ज्ञान की वह रेखा
जहाँ पहुँचकर
मनुष्य स्वीकार करता है
अभी बहुत कुछ
अनकहा है।
और शायद
सबसे गहरा मौन वही है
जहाँ प्रश्न
अपने ही गुरुत्व में
धीरे-धीरे डूब जाते हैं।
मुकेश ,,,,,,,,,,,,
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