होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक

Sunday, 19 April 2026

एक स्पर्श की कमी

 एक स्पर्श की कमी

सम्पूर्ण संबंध का शून्य है


धीरे-धीरे

जैसे कोई नदी

अपने ही किनारों से कट जाए


हम साथ होते हैं

बातें भी होती हैं

हँसी भी

तस्वीरें भी


लेकिन


बीच में

एक अदृश्य दूरी

जमी रहती है


स्पर्श

सिर्फ त्वचा का नहीं होता


वह

स्वीकृति का संकेत है

विश्वास की भाषा है

और प्रेम की सबसे पुरानी लिपि


जब वह नहीं होता


तो शब्द

औपचारिक हो जाते हैं

और भावनाएँ

अनुमान


दो लोग

पास बैठते हैं


लेकिन

उनके बीच

कोई पुल नहीं बनता


वे एक-दूसरे को

समझते नहीं

सिर्फ

समझने का अभिनय करते हैं


एक हाथ

जब दूसरे हाथ तक नहीं पहुँचता


तो दूरी

सिर्फ इंचों में नहीं

जीवन में मापी जाती है


स्पर्श की कमी


धीरे-धीरे

रिश्ते को

एक खाली कमरे में बदल देती है


जहाँ सब कुछ रखा है

पर कोई रहता नहीं


हम सोचते हैं

कि रिश्ता शब्दों से चलता है


पर सच यह है

कि वह

स्पर्श से जीवित रहता है


और जब

वह एक साधारण-सा

हाथ रखना

कंधे पर

या उँगलियों का हल्का-सा मिलना

खो जाता है—


तो


सम्पूर्ण संबंध

धीरे-धीरे

शून्य में बदल जाता है


फिर भी


कहीं

बहुत भीतर


एक संभावना

अब भी बची रहती है


कि एक दिन

कोई हाथ

फिर से

किसी हाथ को छू ले


और


शून्य

धीरे-धीरे

भरने लगे।


मुकेश ,,,,,,,,,,,

No comments:

Post a Comment