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Thursday, 14 May 2026

सुबह के व्यस्त घंटों में

 सुबह के व्यस्त घंटों में

Kolkata की उस ऊँची इमारत के फ्लैट में

वह स्त्री

एक साथ कई ज़िंदगियाँ जी रही होती है।


लैपटॉप पर

फ़ाइनैन्स की मीटिंग चल रही है,

स्क्रीन पर ग्राफ़ ऊपर-नीचे हो रहे हैं,

और उसी बीच

रसोई से टोस्ट की महक आती है।


वह हेडफ़ोन लगाए हुए

धीरे से कहती है

“एक मिनट, मैं अभी आई…”

फिर बच्चों के कमरे की ओर भागती है।


“दूध पूरा पीना…”

“टिफ़िन रख लिया न?”

“ऑनलाइन क्लास का लिंक खुल गया?”


उसकी आवाज़ में

ममता और जल्दी

दोनों साथ रहती हैं।


एक हाथ से

वह कंपनी का बजट सँभालती है,

दूसरे हाथ से

बच्चों की प्लेट में

मक्खन लगाती है।


कभी चाय ठंडी हो जाती है,

कभी उसकी अपनी भूख

मीटिंगों के बीच कहीं छूट जाती है,

लेकिन उसे याद रहता है

किस बच्चे को

पराँठा पसंद है,

और कौन आज उदास लग रहा था।


दुनिया उसे

“फ़ाइनैन्स मैनेजर” कहती है,

पर घर की सुबहें जानती हैं

कि वह दरअसल

एक छोटा-सा ब्रह्मांड सँभाल रही है—

जहाँ एक्सेल शीटों के बीच भी

माँ का दिल

सबसे पहले बच्चों के नाश्ते की चिंता करता है।


मुकेश ,,,,,,

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