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Thursday, 14 May 2026

वह स्त्री सिर्फ़ नौकरी नहीं करती,

 Kolkata की उस ऊँची इमारत में

वह स्त्री

सिर्फ़ नौकरी नहीं करती,

सिर्फ़ घर नहीं सँभालती

वह जीवन से

हर दिन एक लंबी लड़ाई लड़ती है।


कभी

अस्पताल की सफ़ेद दीवारों के बीच

डॉक्टरों ने धीमी आवाज़ में

एक कठिन बीमारी का नाम लिया था

Cancer।


उस क्षण

जैसे समय कुछ देर के लिए

रुक गया था।


लेकिन उसने

हार मानना नहीं सीखा था।


कीमोथेरेपी के दिनों में भी

वह बच्चों की कॉपियाँ देखती रही,

ऑनलाइन मीटिंग में

धीमे स्वर में “हाँ” कहती रही,

और रात को

दवाइयों की कड़वाहट के बीच

घर के अगले महीने का हिसाब भी बनाती रही।


उसके झड़ते बालों से ज़्यादा

उसे इस बात की चिंता थी

कि बच्चे डर न जाएँ।


पति अब भी

अपनी चुप्पियों में उलझा रहा,

दुनिया अपनी रफ़्तार में चलती रही,

पर वह स्त्री

धीरे-धीरे

मृत्यु की आँखों में देखकर लौट आई।


अब उसके चेहरे पर

एक अलग तरह की शांति है

जैसे बहुत बड़े तूफ़ान से बच निकला

कोई समुद्री जहाज़।


वह जान चुकी है

कि मनुष्य का साहस

कभी-कभी शरीर से भी बड़ा होता है।


और हर सुबह

जब वह फिर लैपटॉप खोलती है,

बच्चों को नाश्ता देती है,

बिजली के बिल भरती है,

तो लगता है

यह साधारण-सी दिखाई देने वाली स्त्री

दरअसल

अपनी पूरी दुनिया की

सबसे मज़बूत दीवार है।


मुकेश ,,,,,,,,

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