जब हो वही कातिल वही मुंसिफ वही मुद्दई,





जब हो वही कातिल वही मुंसिफ वही मुद्दई,
बताओ उस अदालत में फैसला हो तो कैसे हो ?

मुकेश इलाहाबादी -----------------------------

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है