सच के साथ क्या हो गए


 


सच के साथ क्या हो गए
काफिले से जुदा हो गए

जिन पत्थरों को तरसा उम्र भर
वो बुत आज हमारे खुदा हो गए
 
मुकेश इलाहाबादी -------------

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