मुहब्बत आग का दरिया है , ख़ाक हो गए होते दोनों


मुहब्बत आग का दरिया है , ख़ाक  हो गए होते दोनों
चलो अच्छा हुआ तनहा ही सही ज़िंदा तो हैं हम दोनों
मुकेश इलाहाबादी -----------------------------------

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