बर्फ ने खुद को यूँ कतरा क़तरा न बहाया होता

 

बर्फ ने  खुद को यूँ कतरा क़तरा न बहाया होता
दरिया और समंदर इतनी  शान से न बहा होता
मुकेश इलाहाबादी ------------------------------

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