होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक

Friday, 24 May 2013

तू लाख चाहे या न चाहे

 


तू लाख चाहे या न चाहे अफ़साना बन ही जाएगा तेरी मुहब्बत का
ज़माना इतना भी मासूम नही जो तेरी बेकरारी का शबब न समझे
मुकेश इलाहाबादी ------------------------------------------------------

No comments:

Post a Comment