एक हम थे उम्र भर लिखते रहे उनकी ख़ूबसूरती पे ग़ज़ल


 



एक हम थे उम्र भर लिखते रहे उनकी ख़ूबसूरती पे ग़ज़ल
एक वो थे  ---- पढ़ते रहे किसी और के आखों की तहरीर।।।
मुकेश  इलाहाबादी -------------------------------------------

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