यूँ बिजलियाँ गिराते हुए तुम न आया करो

 



यूँ बिजलियाँ गिराते हुए तुम न आया करो
बेवज़ह राह के सूखे शज़र जल जायेंगे ,,,,,,
मुकेश इलाहाबादी -----------------------------

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