जला के खाक कर दिया जमाने को तेरे जलवों ने

जला के खाक कर दिया जमाने को तेरे जलवों ने
अब कहते हो ‘कि हम इसपे चल के देखेंगे’
मुकेष इलाहाबादी ..............................

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है