बादल भी तेरे शहर मे थम थम के बरसते हैं,,
























बादल भी तेरे शहर मे थम थम के बरसते हैं,,
जो तुम अपने गीले गेसू रह रह के झटकती हो
मुकेश  इलाहाबादी ......................

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