वस्ले यार की बेचैनियॉ तो हम भी समझते हैं?


 

वस्ले यार की बेचैनियॉ तो हम भी समझते हैं?
ये अलग बात हमसे कोई मिलने नही आता !

मुकेष इलाहाबादी .........................

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