हम मीर के घर गये मीर न मिला

हम मीर के घर गये मीर न मिला
ग़ालिब भी अपने घर से थे लापता
गजल की जगह लिख रहे हैं हजल
मुकेष तुम्हे मुकम्मल उस्ताद न मिला

मुकेष इलाहाबादी .................

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

हरिवंश पुराण - तृतीय खंड — भाग 26 - द्वारका का विस्तार

हरिवंश पुराण - भाग ३० — बाणासुर :