रातों की वीरानी ले ले

 

रातों की वीरानी ले ले
मेरी पीर पुरानी ले  ले

इक लम्हा प्यार का देके
मेरी वो जिंदगानी ले ले



अपना सारा दुख देकर
मेरी शम सुहानी ले ले

कांटों का गुलदष्ता देके
मुझसे रातकीरानी ले ले

नज्म और गजल के संग
मेरी सारी कहानी ले  ले

मुकेश  इलाहाबादी ......

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