करके दोस्ती लहरों के साथ

करके दोस्ती लहरों के साथ
छोड दी कस्ती हवाओं के साथ

सजा के बेंदी उसके माथे पे
करदी जुल्फें फजाओं के साथ

चंद क़तरे बचा के पलकों पे
अष्क कर दिये घटाओं के साथ

बोल के बादशाह के खिलाफ
सर रख दिया तलवारों के साथ

अंजाम को नही डरता है मुकेश
आया हूं बुलंद इरादों के साथ


मुकेश  इलाहाबादी ..............

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