हथौड़े की चोट सह गया पत्थर


हथौड़े की चोट सह गया पत्थर
बुत बन कर मुस्कुराया पत्थर

पत्थर दिल इन्सां क्या समझेगा
कित्तने तूफ़ान सहता है पत्थर ?

कितनी नदियों समेटे है पत्थर ?
यही परवत बन के खड़ा है पत्थर

कितनी दूर और किधर है मंज़िल
राह दिखाता बन मील का पत्थर

मुकेश इलाहाबादी -----------------

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