आईना भी कह रहा है, खुद को सजाया न करो

आईना भी कह रहा है, खुद को सजाया न करो
बला की सादगी है कंही बेनक़ाब जाया न करो
मुकेश इलाहाबादी --------------------------------

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

हरिवंश पुराण - तृतीय खंड — भाग 26 - द्वारका का विस्तार

हरिवंश पुराण - भाग ३० — बाणासुर :