चाहत और यादों की चादर ओढ़ कर

चाहत और यादों की चादर ओढ़ कर
ज़िंदगी की तमाम सर्द रातें काट दी
मुकेश इलाहाबादी -------------------

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बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है