ख़त का हमारे जवाब आया लेकिन

ख़त का हमारे जवाब आया लेकिन
हमको दुश्मने जाना लिखा लेकिन

बैठे तो थे हम भी महफ़िल में उनके
सबको देखा हमको न देखा लेकिन

हुई तबीयत ऐ नाशाज़ जिनके वास्ते
मिज़ाज़पुर्शी को भी न आया लेकिन

जी तो उसका भी बहलता है मुझी से
फिर क्यूँ मुझको न बुलाया लेकिन ?

ख़ाक बन के लिपट जाऊं कदमो से
फिर कुछ सोच के रुक गया लेकिन

मुकेश इलाहाबादी ----------------------

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