आसमाँ पे पहरे हैं, उड़ के क्या करूँ ?

आसमाँ पे पहरे हैं, उड़ के क्या करूँ ?
आओ चलो रख लूँ अपने पर उतार के
मुकेश इलाहाबादी ---------------------

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