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Friday, 4 July 2014

जब से छोड़ के गए हो तुम शहर मेरा

जब से छोड़ के गए हो तुम शहर मेरा
तब से ये आख्नें किसी की मुंतज़िर नहीं
मुकेश इलाहाबादी ----------------------