वो अफ़साना निगार

 हम तो तुझे हूँ ब हूँ चाँद बनाने का हुनर रखते हैं दोस्त
 मुकेश इलाहाबादी

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है