लोग बैठे हैं घरों में अपने अपने

लोग बैठे हैं घरों में अपने अपने सूरज उगा के
हम भी बैठे हैं अँधेरे में ख़्वाबों का चाँद उगा के
मुकेश इलाहाबादी --------------------------
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