सावन की झड़ी सी

सावन की झड़ी सी
वो कुड़ी सांवली सी
सूरत व सीरत में
प्यारी सी भली सी
बातें हैं उसकी जैसे
मिस्री की डली सी
रंगत उसकी जैसे
जूही की कली सी
अजनबी शहर में
लगती अपनी सी

मुकेश इलाहाबादी -

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