आज भी दिल किसी के हिज़्र औ तस्सवुर में रहा आया

आज भी दिल किसी के हिज़्र औ तस्सवुर में रहा आया
सुबह से शाम तलक दिले नादाँ कल सा मायूस पाया
जब - जब फुर्सत रही दिल खयाले यार में मशगूल रहा
मुहब्बत है ही ऐसी शै जिसमे हर इंसा को डूबता पाया
मुकेश इलाहाबादी ---------------------------------------

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