ज़माना ख़िलाफ़ था

ज़माना ख़िलाफ़ था 
ख़ुदा  मेरे  साथ था 

न  नीचे ज़मी थी  न 
ऊपर  आसमान था 

तेरी  यादों बातों  का 
मेरे संग असबाब था  

रात जब नींद आई 
तेरा  ही  ख्वाब था 

मुझे नई ज़िंदगी दी 
वो तेरा ही प्यार था 

मुकेश इलाहाबादी - 

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