बियाबाँयह जंगल है खो जाओगे

बियाबाँयह  जंगल है खो जाओगे
मुझसे मिलोगे तो मेरे हो जाओगे
मेरी कहानी क्या करोगे सुनकर?
बेवजह तुम भी दुखी हो जाओगे !
मुकेश इलाहाबादी ---------------

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

हरिवंश पुराण - तृतीय खंड — भाग 26 - द्वारका का विस्तार

हरिवंश पुराण - भाग ३० — बाणासुर :