तिश्नगी को दो बूँद आब चाहिए

तिश्नगी को दो बूँद आब चाहिए
नींद आने को कुछ खाब चाहिए
मैंने इक और ख़त भेज है तुझे
हाँ या न कुछ तो जवाब चाहिए
हमें न ख़ुदा न खुदाई से ग़रज़
हम तो रिंद हैं हमें शराब चाहिए
हमको अपनी वफाओं का नहीं
तेरी बेवफाई का हिसाब चाहिए
कर तो लें हम भी ईश्क़ मग़र
तुम जैसा हुश्नो शबाब चाहिए
मुकेश इलाहाबादी -----------

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