तुम अपना आसमानी आँचल लहरा दो
तुम अपना आसमानी आँचल लहरा दो
मैं परिंदा हूँ बहुत दूर तक उड़ सकता हूँ
ये और बात मुझे बुतपरश्ती पसंद नहीं
मगर तेरे लिए मैं, ये भी कर सकता हूँ
मुकेश इलाहाबादी ---------------------
मैं परिंदा हूँ बहुत दूर तक उड़ सकता हूँ
ये और बात मुझे बुतपरश्ती पसंद नहीं
मगर तेरे लिए मैं, ये भी कर सकता हूँ
मुकेश इलाहाबादी ---------------------
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