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Thursday, 13 October 2016

चरागों को बुझा दिया जाए

चरागों को
बुझा दिया जाए
सूरज पे,
पर्दा लगा दिया जाये
चाँद को
बादलों से ढक दिया जाए
कि,
तेरे चेहरे का नूर ही
काफ़ी है रोशनी के लिए
सुमी - के लिए
मुकेश इलाहाबादी -----

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