या तो ख़ुदा की ख़ुदाई से डरता हूँ

या तो ख़ुदा की ख़ुदाई से डरता हूँ
या तो मै तेरी जुदाई से डरता हूँ

ईश्क़ में जान जाने का ख़ौफ़ नहीं
मै बेवज़ह की रुसवाई से डरता हूँ

महफ़िलों में इस लिए जाता हूँ मै
अपने अंदर की तनहाई से डरता हूँ

मुकेश इलाहाबादी ------------------

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है