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Saturday, 21 February 2026

फ़ेहरिस्त

 फ़ेहरिस्त

मुझे मालूम है

मैं तेरे पसंदीदा लोगों की

फ़ेहरिश्त में कहीं नहीं।


न तेरी महफ़िल की पहली कुर्सी पर,

न तेरे दिल की किसी रौशन खिड़की में।

मैं शायद भीड़ के उस सिरे पर खड़ा हूँ

जहाँ नाम पुकारे नहीं जाते,

सिर्फ़ हवा चलती है

और लोग गुज़र जाते हैं।


मगर सुनो ,


मेरी फ़ेहरिश्त बहुत छोटी है,

उसमें शोर नहीं,

न कई चेहरों की भीड़।


उसमें सिर्फ़ एक नाम है

और वो तेरा है।


मैंने कितनी ही बार

अपने दिल की अलमारी खोली,

सोचा कुछ और नाम रख दूँ,

कुछ और रिश्तों की तस्वीरें टाँग दूँ—


मगर हर बार

तेरा नाम

जैसे क़लम से नहीं,

क़िस्मत से लिखा मिला।


तू शायद मुझे

एक आम लम्हे की तरह

याद करता होगा—

या शायद याद भी नहीं।


पर मैं

मैंने तुझे

हर साँस की शुरुआत में रखा है,

हर दुआ की आख़िरी पंक्ति में।


तेरा नाम

मेरे दिनों का उजाला है,

और रातों का तसब्बुर।


मैं जानता हूँ

तू अपनी दुनिया में मुकम्मल है,

तेरी फ़ेहरिश्त लंबी है,

रंगीन है,

रौनक़ से भरी।


और मैं

बस एक सादा-सा सफ़हा हूँ,

जिस पर तेरी याद की स्याही

धीमे-धीमे फैलती रहती है।


कभी लगता है

ये मोहब्बत नहीं,

एक ख़ामोश इबादत है

जिसमें जवाब की उम्मीद नहीं होती,

सिर्फ़ अकीदत होती है।


मैंने तेरे नाम को

अपने अंदर ऐसे रखा है

जैसे कोई दरवेश

तस्बीह के दानों में

एक ही नाम दोहराता रहे।


तू मेरी फ़ेहरिश्त का

पहला भी है,

आख़िरी भी

और दरमियान में

कोई जगह खाली नहीं।


शायद एक दिन

ये नाम

मेरी रूह से भी हल्का हो जाए,

या शायद और गहरा उतर जाए


मगर आज

सच इतना ही है

कि जहाँ तेरी दुनिया में

मैं कहीं नहीं,


वहीं मेरी दुनिया में

तू ही तू है।


और ये फ़ेहरिश्त

किसी को दिखाने के लिए नहीं

बस अपने दिल को

यक़ीन दिलाने के लिए है

कि मोहब्बत

भीड़ से नहीं,

एक नाम से मुकम्मल होती है।


मुकेश -------

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