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Tuesday, 17 February 2026

आओ, अन्टार्कटिका पे मुहब्बत करें,

आओ, अन्टार्कटिका पे मुहब्बत करें,
जहाँ बर्फ़ की चादरें
आसमान की नीली शांति से टकराती हैं,
और हवाएँ अपने गीत खुद बनाती हैं।
आओ, हम वहाँ कदम रखें
जहाँ कोई नहीं, केवल खालीपन है,
और खालीपन में हम अपनी धड़कनों को सुन सकते हैं,
जैसे हर ह्रदय का संगीत
सिर्फ़ मौन में खुलता है।
हम अपने हाथों में हाथ डालकर चलेंगे,
बर्फ़ के मैदानों में,
जहाँ पंखों वाली हवाएँ
हमारी सांसों में घुल जाएँगी।
यहाँ कोई उम्मीदें नहीं,
कोई शिकायतें नहीं,
सिर्फ़ अनंत सफ़ेद में
हमारी छाया आपस में मिल जाएगी।
आओ, हम वहाँ अपनी आवाज़ें खो दें,
जहाँ शब्द व्यर्थ हैं,
और केवल महसूस करना ही
असली संवाद बन जाता है।
हम अपने प्यार को
किसी गर्माहट की तलाश में नहीं ढालेंगे,
बल्कि उसकी ठंड में
अपने आप को पिघलने देंगे।
यहाँ बर्फ़ भी कहती है अपनी कहानी,
और बर्फ़ की कहानी सुनकर हम समझेंगे,
कि प्रेम केवल आग नहीं,
बल्कि ठंड में भी खिलने वाला फूल है।
हम अन्टार्कटिका की रातों में
एक-दूसरे की छाँव बनेंगे,
और सितारों की चमक में
अपने हृदयों की लहरें देखेंगे।
हम वहाँ बर्फ़ की पिघलन में नहाएंगे,
हवा के छूने से नाचेंगे,
और शून्य में
हमारा प्रेम
एक प्रयोगधर्मी कविता बन जाएगा।
यहाँ कोई नियम नहीं,
कोई परंपरा नहीं,
कोई सीमा नहीं,
बस अन्टार्कटिका का विशालपन
और हम—
दो आत्माएँ जो एक दूसरे में
अंतहीन रूप से मिल रही हैं।
आओ, अन्टार्कटिका पे मुहब्बत करें,
जहाँ हर कदम
हमें खुद की खोज में ले जाएगा,
जहाँ हर ठंडी हवा
हमें एक दूसरे की आग में पिघलने देगी,
और यहाँ, इस प्रयोगधर्मी प्रेम में
हम जान लेंगे कि
सिर्फ़ एहसास करना ही
सबसे बड़ी क्रिया है।
मुकेश्,,,

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