रात की आख़िरी बस
रात की
आख़िरी बस—
थके हुए शहर से
धीरे-धीरे गुजरती हुई।
कुछ लोग
नींद से भरी आँखों में
घर का रास्ता लिए बैठे हैं,
और खिड़की के बाहर
पीली रोशनी वाले लैम्पपोस्ट
एक-एक कर
पीछे छूटते जा रहे हैं।
बस चलती रहती है—
जैसे रात
अपने आख़िरी सफ़र पर हो।
मुकेश्,,,,,,
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