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Tuesday, 17 March 2026

तुझे देख कर लगा

 तुझे देख कर लगा

जैसे सुबह ने

अपनी पहली किरण

किसी इंसान की सूरत में रख दी हो।

तेरे चेहरे पर

उजाले की वही नर्मी है,

जो रात भर की ख़ामोशी के बाद

धीरे से जन्म लेती है।

मगर ऐ नाज़नीन,

यह भी याद रख—

सुबह की रौशनी

ज़्यादा देर नहीं ठहरती।

ज़िंदगी भी

शायद बस इतनी ही है—

एक सुबह की चमक

और एक शाम की ख़ामोशी।

इसलिए

जो ख़्वाब तेरी आँखों में हैं

उन्हें अभी जी ले,

जो मोहब्बत तेरे दिल में है

उसे अभी कह दे।

क्योंकि

जब शाम उतर आएगी

तो तेरी यह कहानी

सिर्फ़ हवा की सरगोशियों में रह जाएगी।

मुकेश्,,,, 

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