ऐ हुस्न,
तू शायद
आसमान की किसी भूली हुई दुआ का
ज़मीन पर उतर आया जवाब है।
तेरी सूरत में
सुबह की रौशनी की नर्मी है,
और तेरी आँखों में
किसी अनकहे ख़्वाब की चमक।
मगर ऐ नाज़नीन,
दुआएँ भी
हमेशा नहीं ठहरतीं—
वो आती हैं
और फिर
हवा की तरह गुज़र जाती हैं।
सो जब तक
तेरी पलकों पर
उजालों की यह बारिश है,
अपने दिल की हर आरज़ू
मुस्कुरा कर जी ले।
क्योंकि
कभी-कभी
ज़िंदगी की पूरी कहानी
बस एक सुबह
और एक शाम में
समट जाती है।
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