किताब से निकालकर मेज़ पर रख दिया।
- Get link
- X
- Other Apps
कल रात
मैंने उसकी याद को
किताब से निकालकर
मेज़ पर रख दिया।
सोचा,
अब इससे कोई रिश्ता नहीं।
सुबह देखा—
याद वहीं थी,
पर किताब चली गई थी।
तब समझ में आया,
कुछ लोग
जीवन से नहीं जाते।
वे बस
उस जगह आकर बैठ जाते हैं
जहाँ हम स्वयं को पढ़ते हैं।
मुकेश ,,,,,,,,,
- Get link
- X
- Other Apps
Comments
Post a Comment