उसने कभी मेरे हाथ नहीं थामे,

 उसने कभी

मेरे हाथ नहीं थामे,

फिर भी

मेरी उँगलियों में

उसकी अनुपस्थिति बसी रही।

जैसे कोई अंगूठी

उतार ली गई हो,

पर उसकी गोलाई

त्वचा पर बची रह जाए।

वर्षों बाद भी

जब मैं अकेला चलता हूँ,

एक हाथ

अनायास खाली हो जाता है।

मुकेश ,,,,,,,,,

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है