हम, तुम और लौटना
हम, तुम और लौटना
कभी-कभी मुझे लगता है कि हमारे बीच सबसे ख़ूबसूरत बात मिलना नहीं है।
लौटना है।
तुम हर बार
किसी न किसी बहाने
मेरे पास लौट आते हो।
कभी किसी पुराने गीत में,
कभी चाय की पहली भाप में,
कभी शाम की उस ख़ामोशी में
जिसका कोई कारण नहीं होता।
मैंने एक दिन
अपने दिल से पूछा—
तुम उसे
इतनी आसानी से जाने क्यों देते हो?
दिल ने कहा—
जो अपना हो,
उसे रोका नहीं जाता।
उसे बस
लौटने की जगह दी जाती है।
तब मुझे समझ आया,
प्रेम
किसी को बाँधने की कला नहीं,
उसके लिए
अपने भीतर
एक दरवाज़ा खुला छोड़ देने का नाम है।
हो सकता है
तुम कभी वापस न आओ।
लेकिन
मैं उस दरवाज़े को
बंद नहीं करूँगा।
क्योंकि
कुछ लोग
घर में नहीं रहते,
घर होने का एहसास बनकर रहते हैं।
और ऐसे लोग
लौटें या न लौटें,
उनके लिए
भीतर
हमेशा एक दीपक जलता रहता है।
मुकेश
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