शब्दयात्री - देवताओं की भूख

 शब्दयात्री  - देवताओं की भूख

देवताओं को अमृत मिला,

संतोष नहीं।

मनुष्यों को मृत्यु मिली,

फिर भी वे प्रेम करते रहे।

तभी से देवता

मनुष्यों से ईर्ष्या करते हैं।

वे मंदिरों में नहीं,

प्रेमियों की बातचीत में

छिपकर सुनते हैं

कि नश्वरता के भीतर

आख़िर ऐसा क्या है।

मुकेश ,,,,,,,,,

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है