नज़्म - धुंध का व्याकरण
नज़्म - धुंध का व्याकरण
मैंने तुम्हें नाम से पुकारना चाहा
पर नाम बहुत छोटे निकले।
तब मैंने तुम्हें
एक अधूरी ऋतु कहा।
धुंध दरअसल मौसम नहीं,
देह और दूरी के बीच का
व्याकरण है।
जहाँ शब्द
अपने अर्थ उतार कर
नंगे खड़े रहते हैं।
मुकेश ,,,,,,,,,
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