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Tuesday, 30 June 2015

तेरी मासूमियत हमें कुछ कहने नहीं देती

तेरी मासूमियत हमें कुछ कहने नहीं देती
वरना, सोच के तो आये थे बातें बहुत हम
मुकेश इलाहाबादी -------------------------

सुख , दुःख के हरहराते समंदर के बीच

सुख ,
दुःख के हरहराते
समंदर के बीच
तुम्हारी यादों का टापू

मुकेश इलाहाबादी --

जब, तुम होती हो साथ

एक
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जब,
तुम होती हो साथ
बरसता रहता है
मौन संगीत
अहर्निश

(अब एक लम्बी खामोशी है )
दो
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देखना
एक दिन छंट
जाएंगे हिज़्र के बादल
तब
मुसुकुरायेगा चाँद
हँसेगी रात

मुकेश इलाहाबादी ---------

Monday, 29 June 2015

चलो,मुस्कुरा कर देखते हैं

चलो,मुस्कुरा कर देखते हैं 
ग़मो को छुपा कर देखते हैं 

वह भी तो बहुत उदास है  
उसको हंसा कर देखते हैं 

चाँद निकल आया होगा ?
छत पर जा कर देखते हैं 

जानता हूँ, वह न  मानेगी 
फिर भी मना कर देखते हैं  

महताब बदली में छुपा है 
ज़ुल्फ़ हटा कर देखते  हैं 
  


मुकेश इलाहाबादी ------

खिलखिला के हंसती है

खिलखिला के हंसती है,मुस्कुराना नहीं आता
मासूम इतनी कि सजना संवरना नहीं आता
ईश्क  की  बातें वह समझती नहीं और इधर
हाले दिल हमको भी तो समझाना नहीं आता
हमारी तमाम कमियां एक -२ कर गिना गया
मगर हमको अपनी खूबियां बताना नही आया
 मुकेश इलाहाबादी ---------------------------

Thursday, 25 June 2015

कुछ तो खुरदुरापन रख ,ऐ दोस्त

कुछ तो खुरदुरापन रख ,ऐ दोस्त
नज़रें टिकती ही नहीं तेरे शीशा ऐ जिस्म पे
मुकेश इलाहाबादी ----------------------------

गर ऐतबार नहीं तुझको

गर ऐतबार नहीं तुझको, मेरी बात पर
क्या रख दूं तेरे सामने मैं दिल निकाल कर
मुकेश इलाहाबादी ----------------------------