ये अदाएं, ये ज़लवे, और बातों की जादूगरी हमें कंहा आती थी

गुस्ताखी माफ़ !!!
 
ये अदाएं, ये ज़लवे, और बातों की जादूगरी हमें कंहा आती थी
ये तो आपकी सोहबत का असर है,हम कुछ दुनियादार हो गए 
 मुकेश इलाहाबादी ---------------------------------------

Comments

  1. बहुत खूब कहा...............

    सादर.

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है