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Showing posts from September, 2013

गम नहीं कि मेरे इश्क का चर्चा हुआ,,

गम नहीं कि मेरे इश्क का चर्चा हुआ,, गम है मेरे एहसासों को समझा न गया मुकेश इलाहाबादी ------------------------

मुक्त केश संदल त्वचा, अधरों पे मुस्कान

मुक्त केश संदल त्वचा, अधरों पे मुस्कान गोरी,वक्र भौंहे ऐसी  लगें जैसे तीर कमान मुकेश इलाहाबादी ---------------------------

आँख भर आती है जब कोई मुहब्बत से देखता है

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आँख भर आती है जब कोई मुहब्बत से देखता है कि अब आदत सी हो गयी है बेरुखी सहने की मुकेश इलाहाबादी --------------------------------