तुमको वक़्त नही मिलता
तुमको वक़्त नही मिलता मुझकॊ और नही मिलता ज़िंदगी उलझा हुआ मांझा ढूंढो तो छोर नही मिलता चोरियां तो ज़ारी हैं बदस्तूर मगर कोई चोर नही मिलता लोग गला रेत जाते हैं यहाँ हाथों मे खज़र नही मिलता मुकेश इलाहाबादी......
“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”