Posts

Showing posts from February, 2013

बड़ी मुस्किल से तो हम किनारे आये हैं

Image
बड़ी मुस्किल से तो हम किनारे आये हैं नदी की धार को धता बता के आये हैं सुबह से ही सूरज आग उगल रहा है अपने बदन पे चन्दन लपेट के आये हैं सूरत देख कर भरोसा करना ठीक नहीं साधुओं के भेष मे लुटेरे भी आये हैं अब चाँद से भी लपटें उठा करती हैं मूकेश चाँदनी से ही बदन पे छाले आये हैं मुकेश इलाहाबादी ---------------------------

गैरों से इस नाचीज़ का पूछा है हाल !

Image
  गैरों से इस नाचीज़  का पूछा है हाल ! उम्मीदे इकरार में जी रहा हूँ बहरहाल मुकेश इलाहाबादी ----------------------

बड़ी मुस्किल से तो हम किनारे आये हैं

बड़ी मुस्किल से तो हम  किनारे आये हैं नदी  की  धार  को  धता  बता के आये हैं सुबह  से  ही  सूरज  आग  उगल  रहा  है अपने बदन पे चन्दन  लपेट  के  आये  हैं सूरत देख कर भरोसा करना ठीक  नहीं साधुओं  के  भेष  मे लुटेरे  भी  आये  हैं अब  चाँद   से  भी  लपटें  उठा  करती हैं मूकेश चाँदनी से ही बदन पे छाले आये हैं मुकेश इलाहाबादी -----------------------------

तुम हमें पत्थर समझो शिकायत नहीं

Image
  तुम हमें पत्थर समझो शिकायत नहीं सर झुकाऊँ किसी के आगे आदत नहीं मुकेश इलाहाबादी ---------------------

मौसम गुज़र गया , बरसात न हुई

Image
  मौसम  गुज़र गया , बरसात न हुई आसमा से ज़मी की मुलाक़ात न हुई यूँ  तो हम मिलते रहे रोज़  ब  रोज़ दोस्ती  की  अपनी  शुरुआत  न हुई जब दिन ढला आये, शाम ढले गए साथ उनके कभी वसले रात न हुई सिर्फ नज़रों ही नज़रों से बात हुई अपनी कभी खातो किताबत न हुई रूठने और मनाने की हसरत रही हमें एक दूजे से शिकायत न हुई मुकेश इलाहाबादी ---------------------

न रस्ता सुझाई दे

Image
  न  रस्ता  सुझाई दे न मंजिल दिखाई दे जहां में शोर इतना कुछ न  सुनाई  दे जो सबसे बड़ा झूठा सच्चे की दुहाई दे जो गलत है नही वह क्यूँ सफाई दे ? खुदा इश्क वालों को न  लम्बी  जुदाई  दे मुकेश इलाहाबादी ---

तुमने ज़ुल्फ़ को संवारा होगा

Image
  तुमने ज़ुल्फ़ को संवारा होगा आइना भी मचल गया होगा हवाएं भी तो मनचली  ठहरी लटों को बिखरा दिया होगा दरीचे पे तुम्हे खड़ा देख कर राही दर पे ठिठक गया होगा फूल की रजामंदी  थी  तभी भँवरे ने चुम्बन लिया होगा न उम्मीद होकर ही उसने तुमसे किनारा किया होगा मुकेश इलाहाबादी --------

हाथो में प्यार की हिना रचाए बैठी है

Image
  हाथो  में प्यार की हिना रचाए बैठी है गोरी द्वार में रंगोली सजाये बैठी है आसमानी आँचल में साजा के सितारे माथे पे चाँद की बिंदिया लगाए बैठी है आखों में जगमाते हुए उम्मीद के दिए अधरों पे मधुर मुस्कान लिए बैठी है सतरंगी चूड़ियों से भर भर के कलाई हाथो में नेह के दीपक जलाए बैठी है इंतज़ार का बदला भी तो लेगी गोरी मन में कई झूठे उलाहने लिए बैठी है मुकेश इलाहाबादी ------------------------

गैरों से इस नाचीज़ का पूछा है हाल

Image
गैरों  से  इस  नाचीज़  का पूछा है हाल उम्मीदे इकरार मे जी रहा हूँ बहारहाल मुकेश इलाहाबादी ---------------------

कदमो तले आपके दिल बिछा दिया

Image
    कदमो तले आपके दिल बिछा दिया आपकी नाज़ुकी का हमको ख़याल है जानता हूँ  है  जो  फूल  मेरे  हाथ  मे फूल वो  अपने  आपमे  बेमिसाल है मुकेश इलाहाबादी ------------------

कभी धुप में लेटे तो कभी छांह में बैठे

Image
कभी धुप में लेटे तो कभी छांह में बैठे वीरान सी दोपहर में यूँ  अनमने  बैठे बालों में कभी बेवज़ह उंगलियाँ फिराई फिर  उनके  ही  ख्यालों में   ऊंघते बैठे आ रही रोशनी बादलों से छन छन के ऐसी पीली पीली  धुप में  गुनगुने बैठ जानी कब सरक गयी धुप दीवार से सिमटती परछाईयों  को देखते बैठे जाने क्या चाहती हैं बेचैन  निगाहें ? कभी छज्जे पे खड़े कभी मुंडेर पे बैठे मुकेश इलाहाबादी ---------------------

तुम न आओगे मनाते रहे उम्रभर

Image
  तुम न आओगे मनाते रहे उम्रभर बेवजह घर को  सजाते रहे उम्रभर जलाकर खाक किया अपना वजूद घर  अपने सूरज उगाते रहे उम्रभर भर  गया  है कांटो से दामन मेरा शायद  कैक्टस उगाते रहे उम्रभर थी पास मे हमारे दौलते मुहब्बत उसे भी खुलके लुटाते रहे उम्रभर रेत पे लिखते रहे तेरा नाम फिर लिख लिख के मिटाते रहे उम्रभर हर रात हमे मिलती रही अमावश रुठा हुया चॉद मनाते रहे उम्रभर मुकेश इलाहाबादी -------------------- ं

पतझड़ ने छीन ली, सारी जवानियाँ,

Image
  पतझड़ ने छीन ली,  सारी  जवानियाँ, दरख़्त पे रह गयी, फक्त सूखे डालियाँ कांपती हैं कलियाँ, अब गुलफरोश  से, जाने कब बिक जाए, उनकी शोखियाँ चराग़ भी बिक गए, अंधेरों के हाथ मे,, रोशनी दिखायेगी, बादल की बिजलियाँ ख़त तुम्हारे सारे ,करके आग के हवाले  यूँ  हमने  मिटा दी ,  सारी   निशानियाँ कागजी फूल खिला के, सोचते हैं लोग गुलशन में  उनके,  उडेंगी   तितलियाँ मुकेश इलाहाबादी ----------------------

वे अकेले नहीं हैं

Image
  वे अकेले नहीं हैं शहर मे साथ है उनके चिरई, चुनगुन और यह खाली आकाश वे अकेले नहीं हैं कतई, काम के वक़्त भी साथ है उनके छेनी, हथौड़ी, मशीनों की खातर पटर और उनके साथ की दर्जनों उदास आखें वे अकेले नहीं हैं ख्यालों में भी साथ है उनके दिहाड़ी का हिसाब या पी ऍफ़ व ग्रेचुटी का कैल्कुलेसन वे अकेले नहीं हैं दडबे नुमा घर में भी साथ है उनके चूल्हे पे खदबदाती दाल और बेहद काली लम्बी रात मुकेश इलाहाबादी ---------------------

सूरज के शहर में नंगे पाँव चलते रहे

Image
  सूरज के शहर में नंगे पाँव चलते रहे आग ही पीते रहे आग ही उगलते रहे कभी गर्दो गुबार कभी वक़्त के थपेड़े सफरे जीस्त में जाने क्या - 2 सहते रहे किस्मत अपनी सर्द गरीब की चादर रही हम कभी सर तो कभी पैर को ढंकते रहे ---- मुकेश इलाहाबादी -------------------------

सच के साथ क्या हो गए

Image
  सच के साथ क्या हो गए काफिले से जुदा हो गए जिन पत्थरों को तरसा उम्र भर वो बुत आज हमारे खुदा हो गए   मुकेश इलाहाबादी -------------

ज़िन्दगी बेमजा हो गयी,,

Image
  ज़िन्दगी  बेमजा  हो  गयी,, सिर्फ सज़ा ही सज़ा हो गयी रूठ के तुम चले गए हो , ,, मुझसे क्या खता हो गयी ? अब  तो तारे भी उदास हैं ,, चांदनी जो लापता हो गयी ज़माना तो  रूठा ही था ,,,, मौत भी खफा हो गयी ..... ओढ़ ली अँधेरे की चादर ,, रोशनी तो बेवफा हो गयी देख कर कांटो का तेवर ,, कली  खौफज़दा हो गयी .. शब् भर मुस्कुराई रातरानी सहर होते ही ग़मज़दा हो गयी मुकेश इलाहाबादी -----------
Image
  हमने तो खुद ही मौत चाही है तेरे  खंज़रे हुस्न से मौत भी हो जाती है  हसीन तेरे खंज़र ऐ  हुस्न से मुकेश इलाहाबादी -------------------------------------

बेचैनियाँ मेरी आप पढ़ लो

Image
  बेचैनियाँ मेरी आप पढ़ लो बिस्तर की सिलवटों से देख लो दिल मेरा गौर से   दर्द निहां है मुस्कुराहटों मे अक्श देखता हूँ अक्शर अपना तेरी आखों की  परछाइयों मे मुकेश इलाहाबादी ---------------- -